दुनियां के अभूतपूर्व मेलों में अग्रणीय हैं हरिद्वार का महाकुंभ

ग्रहो प्रभाव से अमृतमय हो जाता है गंगा का पावन जल

हरिद्वार/देहरादून, (गढ़वाल का विकास न्यूज)। कुम्भ की धार्मिक महत्ता पूरी दुनियां में विख्यात है। मगर कुम्भ में साधु-सन्तो के अखाड़ों की अनुपस्थिति रहे तो ऐसे में कुम्भ की व्यवस्थाऐं अधूरी मानी जायेगी। इसीलिए सरकार ने महाकुम्भ हरिद्वार में अलग-अलग अखाड़ो के लिए एक व्यवस्थित राड़मैप तैयार किया है। इस रोड़मैप के मार्फत अब तक अखाड़ो की पेशवाई और स्नान कुम्भ का आकर्षण का केन्द्र बने हुए है। बुधवार को कुम्भ का विधिवत अगाज हो चुका है। इसके लिए मेला प्रशासन ने बाकायदा एक गाईडलाइन भी जारी की है।

बता दें कि कुम्भ मेला हरिद्वार में आकर्षण का केंद्र तीन शाही स्नान है। जिस पर देश-दुनियां की नजरें टिकी रहती है। 12 अप्रैल चैत्र अमावस्या-सोमवती अमावस्या स्नान, 14 अप्रैल मेष संक्रांति कुंभ स्नान और 27 अप्रैल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा स्नान के दिन शाही स्नान की तिथियां नियत है। इसके अलावा कुम्भ क्षेत्र को दुल्हन की तरह सजाया गया है। रास्ते, विधुत, पेयजल की व्यवस्थित सुविधा कुम्भ में पंहुच रहे मेलार्थियों को मिल रही है। इधर नीलधारा स्थित भव्य प्रेस कान्फ्रेंस हाल, स्टूडियो, पीसीआर आदि की सुविधा क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया कर्मियों के लिए सुविधायुक्त बनाया गया है। कुम्भ मेला मीडिया सेन्टर ने जानकारी जारी करते हुए बताया कि यहां मीडियाकर्मियों को अतिविशिष्ट अतिथियों के साक्षात्कार करने का अवसर भी मिलेगा। मीडिया सेन्टर के अलावा विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलो पर कवरेज हेतु मीडिया प्लेटफार्म स्थल उपलब्ध रहेंगे।

कुम्भ मेला मीडिया सेन्टर के नोडल अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, श्री दिंगबर अणि अखाड़ा, श्री निर्वाणी अणि अखाड़ा और पंच निर्मोही अणि अखाड़ा की पेशवाई और धर्म ध्वजा फहराई जा चुकी है। जबकि आगामी 10 अप्रैल को श्रीनिर्मल अखाड़ा की धर्म ध्वजा फहराई जाएगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आगामी 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2021 तक हरिद्वार महाकुंभ मेला भव्य और दिव्य रूप से प्रस्तुत करने की तैयारी पूर्ण हो चुकी है। हरिद्वार का वर्तमान कुंभ मेला प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में आयोजित होने वाले पिछले सभी कुंभ मेलों से भिन्न और अनोखा है। यहां कुंभ भी है और कोविड भी है। यहां कोविड के नियमों का भी पालन कराना है और कुंभ मेला को भव्यता और दिव्यता को भी बनाये रखना है। आस्था का सैलाब भी है और कोविड के संक्रमण का भय भी है। परन्तु सरकार ने कुंभ मेले को भव्य दिव्य रूप में प्रदर्शित करने के लिये दृढ़ संकल्प लिया है।

कुम्भ मेला का एतिहासिक पक्ष

महाकुम्भ मेला हरिद्वार का विश्व स्तर पर विशालतम व स्वस्फूर्त समागम तथा तीर्थोत्सव माना जाता है। पौराणिक कथानुसार देवता और दैत्य अलौकिक क्षीर सागर के मंथन में अमृत प्राप्ति के लिए एकत्र हुए। यह निश्चित किया गया कि समुद्र मंथन से निकलने वाले रत्नों, पदार्थों को आपस में बांट लेंगे।

कहा जाता है कि दस हजार वर्षों तक देव दानव के सागर मंथन के फलस्वरुप अन्य रत्नों के साथ ही अमृत से भरा कलश भी प्राप्त हुआ। अमृत पीने के बाद दानव अमर हो जायेंगे तब संसार का क्या होगा। इस चिन्ता से देवताओं ने अमृत कलश को छिपाने का निर्णय लिया। इसके लिए देवों और दानवों के बीच संघर्ष हुआ। फलस्वरूप इसके देवताओं के राजा इन्द्र का पुत्र जयंत पहले स्वर्ग के आठ स्थानों पर तथा फिर पृथ्वी पर जहां तहां अमृत कलश को छिपाने के लिए भागता रहा। पुराणों के अनुसार इस संघर्ष से इंद्र के पुत्र जयंत ने अमृत कलश को हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक की भूमि पर रखा। जहां अमृत कलश की कुछ बूंदे भूमि पर गिरी, इन्ही स्थानों पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है।

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार ग्रह नक्षत्रों की विशेष परिस्थिति, इन कुम्भ पर्वों का निर्धारण करती है। कारण इसके लाखों करोड़ों लोग एक निश्चित समय और स्थान पर एकत्र होते हैं। प्रयाग और हरिद्वार का कुम्भ पर्व गंगा के तट पर, उज्जैन का क्षिप्रा नदी तट पर तथा नासिक में गोदावरी नदी तट पर कुम्भ पर्व आयोजित होता है।

प्रयाग और हरिद्वार में ग्रह योग कुछ ऐसा

हर बारहवें वर्ष इन दोनों स्थानों पर कहीं न कहीं कुम्भ का आयोजन होता है, किन्तु खगोलीय गणना, ग्रह दशा एवं राशियों के अनुसार हरिद्वार कुम्भ 2021 का आयोजन 11 वर्ष बाद किया जा रहा है। आम तौर पर माना जाता है कि कुम्भ पर्व स्नान से मानव को जीवन मृत्यु के चक्र से मोक्ष मिल जाता है। यह भी माना जाता है कि कुम्भ क्षेत्र में गंगा जी का समस्त जल सूर्य, चन्द्रमा तथा अन्य ग्रहों के विद्युत चुम्बकीय विकीरण के प्रभाव से रोग मुक्ति के साथ ही अनेक प्रकार के चमत्कारी प्रभावों को देने वाला होता है।

हरिद्वार में प्रत्येक बारह एवं छः वर्ष के अन्तराल पर होने वाला कुम्भ अथवा अर्ध कुम्भ पर्व संसार का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है। खगोल गणनाओं के अनुसार जब सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति कुम्भ राशि में एक साथ होते हैं तब हरिद्वार में कुम्भ पर्व होता है।

हरिद्वार महाकुंभ मेले में महत्वपूर्ण आयाम

कुम्भ क्षेत्र में प्रभावी कार्य एरिया 604 हेक्टेयर में बनाया गया है। इसे 23 सेक्टरों में प्रशासनिक व एक रेलवे का सेक्टर भी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिये अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मीडिया सेंटर की स्थापना, पावनधाम में 150 बेड का बेस अस्पताल, दूधाधारी बाबा बर्फानी चैरिटेबल ट्रस्ट के अस्पताल में आईसीयू युक्त 500 बेड का कोविड यूनिट, इसके अलावा पंतद्वीप व अन्य सेक्टरों में अलग अलग क्षमता के अस्पतालों को भी सुविधा हेतु रखा गया है।

मेला क्षेत्र में 1000 से अधिक शौचालय, 72 से अधिक घाट, फ्लाईओवर-सिंहद्वार, सीतापुर, पुल जटवाड़ा, शंकराचार्य चैक, चंडीचैक, पुराना आरटीओ चैक, शांतिकुंज, नेपाली फार्म नये पुल. धानौरी पुल, सूखी नदी, रानीपुर मोड, दक्ष मंदिर, मातृसदन के पास हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर सौ से अधिक महिला चेंजिंग रूम सुविधा के रूप में स्थापना किए गये है।

उत्तराखण्ड सरकार, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग द्वारा कुम्भ मेला क्षेत्र चंडी द्वीप, नीलधारा में मीडिया सेंटर 2.6 हेक्टेयर में स्थापित किया गया है। जिसमें सभी अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे मेले के सजीव प्रसारण के साथ ही विभिन्न स्थलों पर कैमरा, आप्टिकल फाईबर, ब्राडबैण्ड कनेक्शन सहित कम्प्यूटर स्कैनर्स, फैक्स, फोटो कापियर्स, सुविधायुक्त स्टूडियो, आवश्यक कम्प्यूटर साफ्टवेयर तथा आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। देश-विदेश से आने वाले प्रेस प्रतिनिधियों को मीडिया सेन्टर में अपने कार्यक्रम रिकार्ड करने की सुविधा स्टूडियों में मौजूद है।

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